Wednesday, 5 August 2015

मुंबई की अदालत ने ललित मोदी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया

मुंबई: आईपीएल के पूर्व मुखिया ललित मोदी के खिलाफ मुंबई की विशेष अदालत ने गैर ज़मानती वारंट जारी कर दिया है। मनी लॉन्डरिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने ललित मोदी के खिलाफ केस दर्ज करा रखा है। प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले हफ्ते वारंट जारी कराने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। इस गैर जमानती वारंट के बाद ललित मोदी की गिरफ्तारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
उल्लेखनीय है कि ललित मोदी को लेकर संसद का मॉनसून सत्र अब तक हंगामे की भेंट चढ़ता आ रहा है। ललित मोदी की मदद के आरोपों को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफ़े की मांग पर कांग्रेस अड़ी हुई है।
विशेष न्यायाधीश पीआर भावाके ने मंगलवार को पूछा था कि एजेंसी उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है और गैर-जमानती वारंट मांगा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या जांच के दौरान वारंट जारी किया जा सकता है। ईडी के वकील हितेन वेनेगांवकर ने कहा कि ललित मोदी भारत में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए एनबीडब्ल्यू जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ललित को 2009 से जारी किए गए समनों का उन्होंने पालन नहीं किया है। न्यायाधीश ने पूछा कि क्या ललित मोदी अदालत के समक्ष आरोपी हैं, क्योंकि ईडी ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। न्यायाधीश भावाके ने कहा कि एनबीडब्ल्यू जारी करने के लिए व्यक्ति को अदालत के समक्ष आरोपी होना चाहिए। ईडी के वकील ने कहा कि मामला पूर्व-जांच के स्तर पर है और सुप्रीम कोर्ट ने पिछली एक व्यवस्था में कहा था कि जांच के दौरान एनबीडब्ल्यू जारी किया जा सकता है। अदालत ने पिछले महीने सिंगापुर और मॉरीशस को अनुरोध पत्र जारी किये थे और मामले में वहां के अधिकारियों से सहायता मांगी है।
बीसीसीआई ने 2010 में ललित मोदी के खिलाफ चेन्नई में प्राथमिकी दर्ज की थी। 2008 में बीसीसीआई ने डब्ल्यूएसजी को 91.8 करोड़ डॉलर में 10 साल के मीडिया अधिकार दिए थे। फिर डब्ल्यूएसजी ने एमएसएम से करार करके सोनी को आधिकारिक प्रसारणकर्ता बनाया। बाद में करार को नौ साल के करार से बदल दिया गया जहां एमएसएम ने डब्ल्यूएसजी को 1.63 अरब डॉलर का भुगतान किया। ईडी ने डब्लयूएसजी मॉरीशस को एमएसएम सिंगापुर द्वारा अनधिकृत तरीके से 425 करोड़ रुपये की सुविधा शुल्क के भुगतान के आरोपों की जांच के लिए 2009 में फेमा कानून के तहत पड़ताल शुरू की थी।

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