Friday, 31 July 2015

कांग्रेस MLA उस्‍मान मजीद का दावा- पाकिस्‍तान में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन से मिला

श्रीनगर: कांग्रेस विधायक उस्मान मजीद ने 1993 मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन से दो से तीन बार मिलने का दावा किया है। डीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस्मान मजीद ने टाइगर मेमन से पाक अधीकृत कश्मीर (पीओके) में कई बार मुलाकात की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि याकूब मेमन के आत्मसमर्पण के फौरन बाद टाइगर मेमन ने पाकिस्तान छोड़ दिया था। बताया जाता है कि टाइगर मेमन ने आईएसआई के डर से पाकिस्तान छोड़ दिया और अपने भाई के आत्मसमर्पण से निराश होकर दुबई चला गया। टाइगर मेमन को डर था कि उसके भाई (याकूब) के भारतीय एजेंसियों के सामने सरेंडर करने के बाद आईएसआई उसे मार देगा। इसी डर की वजह से वह पाकिस्तान से दुबई चला गया। लेकिन, आईएसआई उसे फिर से पाकिस्तान वापस ले आया।
रिपोर्ट में मजीद के हवाले से कहा गया है कि आईएसआई नहीं चाहता था कि अपने भाई याकूब मेनन की तरह टाइगर मेनन भी भारतीय अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करे। आईएसआई को डर था कि कहीं याकूब के बाद टाइगर मेनन भी आत्मसमर्पण ना कर दे। इसलिए, वह उसे दुबई से वापस पाकिस्तान ले आया।
कांग्रेस विधायक मजीद ने अखबार से कहा कि याकूब मेनन के सरेंडर से पहले आईएसआई टाइगर मेनन को हर तरह की सुविधाएं दे रहा था। टाइगर मेनन इन सुविधाओं का मौज भी ले रहा था। लेकिन, याकूब मेनन के सरेंडर के बाद आईएसआई ने उसके भाई और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड टाइगर मेनन की सुविधाओं को घटा दिया। उन्होंने दावा किया है कि इसके बाद आईएसआई ने टाइगर मेनन को घर तक उपलब्ध नहीं कराया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि याकूब के सरेंडर से पहले टाइगर मेनन के पास तीन कारें थी। लेकिन, दुबई से वापस पाकिस्तान लौटने के बाद उस सिर्फ एक पुरानी कार ही उपलब्ध कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, मजीद से टाइगर मेमन का परिचय स्टूडेंट लिबरेशन फ्रेंट (SLF) का संस्थापक और इखवान-उल-मुस्लिमीन उग्रवादी संगठन के प्रमुख हिलाल बेग ने करवाया था। माजिद ने साल 1993 के अंत में टाइगर मेमन से मुलाकात की थी। मजीद एक नहीं बल्कि दो से तीन बार टाइगर मेमन से मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, टाइगर मेमन अक्सर मुजफ्फराबाद (पीओके) आया करता था। यहीं कांग्रेस विधायक मजीद ने उससे मुलाकात की थी।
गौरतलब है कि आतंकवाद छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होने वाले मजीद दो साल पाकिस्तान में रहे और उसके बाद भारत लौटकर उन्होंने सरेंडर किया। साल 2002 में उस्मान मजीद ने बांदीपुरा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव जीता। पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन वाली मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार में उस्मान मजीद को राज्यमंत्री बनाया गया। 2014 में मजीद ने कांग्रेस के टीकट पर चुनाव जीता।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं : केंद्र

नई दिल्ली। कुछ राजनीतिक दलों और प्रदेश सरकार की लंबे समय से चली आ रही मांग को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने आज कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाएगा। योजना राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवाल के जवाब में बताया, ‘‘ फिलहाल किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विशेष सहायता पर विचार किया जा सकता है।’’ वह बिहार से सांसद राजेश रंजन द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी लंबे समय से राज्य के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं। पूर्व में जनता दल यू , भाजपा की बिहार ईकाई और लोक जनशक्ति पार्टी भी इस मांग का समर्थन कर चुकी हैं। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि यदि राजस्थान सरकार विशेष पैकेज की मांग को लेकर कोई प्रस्ताव भेजती है तो सरकार उस पर विचार कर सकती है। केवल विशेष श्रेणी वाले राज्यों को ही वर्ष 2014. 15 तक परियोजनाओं विशेष योजना सहायता : 90 फीसदी : और विशेष केंद्रीय सहायता अनुदान : सौ फीसदी : मुहैया कराया गया है।

भारत-बांग्लादेश के बीच जमीन की अदला-बदली आज से शुरू, घुसपैठ रूकेगी

नई दिल्ली: भारत-बांग्लादेश के बीच हुए लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट के तहत आज से शुरू 162 एनक्लेव्स के अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू होगी. एनक्लेव ऐसे छोटे-छोटे रिहाइशी इलाके हैं जो दूसरे देश की जमीन से घिरे हुए हैं. भारत के एनक्लेव बांग्लादेश में और बांग्लादेश के भारत में हैं. सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले करीब 50,000 निवासी ‘नई मिली आजादी’ का जश्न मनाएंगे. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया. बांग्लादेश के कुरिग्राम में भारतीय इंक्लेव में रहने वाले गुलाम मुस्तफा ने कहा, ‘‘ 1947 के बाद से 68 सालों में 68 निशान हैं और हमने व्यथा और गरीबी झेली है.’’ मुस्तफा और कई दूसरे भी नागरिक हैं जो ऐसे 162 एक्लेव में रहते हैं, लेकिन वे स्कूल, क्लीनिक, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं से वंचित हैं. बांग्लादेश और भारत 1974 के एलबीए करार को लागू करेंगे और सितंबर, 2011 के प्रोटोकॉल को अगले 11 महीने में चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे.
समझौते के मुताबिक  भारत अपने इलाके में बने 111 एनक्लेव बांग्लादेश को देगा..बदले में भारत को बांग्लादेश सिर्फ 51 इनक्लेव यानि आधे से भी कम देगा. बंटवारे में जमीन के क्षेत्रफल की बात करें तो भारत को बांग्लादेश से करीब 7 हजार 100 एकड़ जमीन मिलेगी और बांग्लादेश को भारत से 17 हजार 200 एकड़ जमीन मिलेगी. भारत और बांग्लादेश की सीमा इतनी टेढ़ी मेढ़ी है कि इस की निगरानी करना मुश्किल है . इस समझौते से बांग्लादेश की सीमा से होने वाली घुसपैठ को हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.
बांग्लादेश की जमीन पर बने इन भारतीय एनक्लेव में करीब 37 हजार भारतीय रहते हैं..जबकि भारत में बने  एनक्लेव्स में रहने वाले बांग्लादेशियों की तादाद करीब 14 हजार है. जमीन की अदला बदली में इन एनक्लेव्स में रहने वालों को अपनी इच्छा से दोनों में से किसी भी देश की नागरिकता लेने की स्वतंत्रता दी गई है . सर्वे में पता चला है कि भारतीय हिस्से में रह रहे लोग तो वापस अपने देश जाना नहीं चाहते हैं लेकिन बांग्लादेशी इलाके में रह रहे 600 लोग भारत की नागरिकता चाहते हैं . केंद्र सरकार ने विस्थापित हो रहे लोगों के पुनर्वास के लिए 3 हजार 48  करोड़ 3,048 करोड़ के पैकेज का एलान किया है.

लीबिया में ISIS ने चार भारतीयों को किया अगवा, अब तक नहीं मांगी कोई फिरौती

नई दिल्ली। त्रिपोली और ट्यूनिस से भारत लौट रहे चार भारतीय अध्यापकों का कथित रूप से इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह (आईएस) ने लीबिया में अपहरण कर लिया है। सरकार ने आज बताया कि इनमें से दो अध्यापक हैदराबाद के हैं, एक अध्यापक रायचूर और एक बंगलुरु का है। चारों भारतीयों को सिर्त से करीब 50 किलोमीटर दूर एक जांच चौकी पर रोक लिया गया। यह इलाका आतंकवादी संगठन के नियंत्रण में है।
एमईए के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा कि इनमें से तीन यूनिवर्सिटी ऑफ सिर्त में फैकल्टी सदस्य हैं और एक अध्यापक जुफरा में सिर्त यूनिवर्सिटी की शाखा में काम करता है। उन्होंने कहा कि हम अध्यापकों के परिवारों के संपर्क में लगातार बने हुए हैं और चारों भारतीयों को जल्द छुड़ाने और उनकी सलामती सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे है।
स्वरुप ने कहा कि त्रिपोली में हमारे मिशन को दो दिन पहले, 29 जुलाई को शाम करीब 11 बजे पता चला कि त्रिपोली और ट्यूनिस के जरिए भारत लौट रहे चार भारतीयों का सिर्त से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर एक जांच चौकी पर अपहरण किया गया। इनमें से दो भारतीय हैदराबाद के रहने वाले हैं, जबकि एक भारतीय रायचूर और एक भारतीय बंगलूरु का है। तीन भारतीय सिर्त यूनिवर्सिटी में फैकल्टी के सदस्य थे और एक जुफरा में सिर्त यूनिवर्सिटी की शाखा में काम करते थे।
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय त्रिपोली में अपने मिशन के प्रमुख के जरिए मामले संबंधी विस्तृत जानकारी का पता लगा रहा है। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चारों भारतीयों को सिर्त शहर में वापस लाया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब तक फिरौती की कोई मांग नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जिस जगह से भारतीयों का अपहरण किया गया है, वह इलाका इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण में है। इस आतंकवादी संगठन ने इराक और सीरिया में कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है।
भारत सरकार ने संघर्ष प्रभावित लीबिया में चिंताजनक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पिछले वर्ष जुलाई में एक परामर्श जारी करके अपने नागरिकों को लीबिया छोड़ने की सलाह दी थी। यह घटना ऐसे समय हुई है जब इराक में 39 भारतीय लापता है। उन्हें सुन्नी आतंकवादियों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष के चरम के दौरान पिछले वर्ष बंधक बनाया गया था और उन्हें रिहा कराने के प्रयासों का अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है।

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव: नोएडा प्रापर्टी बाजार पर लगा ग्रहण

-बिल्डर्स साइट पर हजारों मकान अधर में। नए प्रोजेक्टों में निवेश के मूड में नहीं दिख रहे निवेशक। रियल एस्टेट सर्वे कंपनी ने किया चौंकाने वाला खुलासा। आगे के 18 माह भी ठंडा रहेगा प्रॉपर्टी बाजार।-
-सर्वे कंपनी का खुलासा, बीते वर्षों के मुकाबले इस वर्ष प्रापर्टी में निवेश करने वालों की संख्या में आई 50 फीसदी तक की कमी-
अश्वनी श्रीवास्तव
नोएडा। प्रापर्टी में निवेश के नजरिए से एनसीआर के लिए 2014-2015 बुरा दौर माना जा रहा हैं। विशेषज्ञों की माने, तो इस दौरान न ही लोगों ने प्रापर्टी में निवेश करना उचित समझा और न ही बिल्डरों ने प्रोजेक्टों को लांच करना। आंकड़ों पर नजर डाले, तो जहां प्रापर्टी के खरीददारों में 50 फीसदी तक गिरावट आई। वहीं नए प्रोजेक्टों की लांचिग में भी 68 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है। दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट में सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट फर्म नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 के पहले छह महीने में प्रॉपर्टी की बिक्री में 50 फीसदी की कमी आई है और इस दौरान सिर्फ 14,250 फ्लैट्स की बिक्री हुई। नाइट फ्रैंक ने इसकी मुख्य वजह फ्लैट की ऊंची कीमत और समय पर प्रोजेक्ट का पजेशन नहीं मिलना बताया है। फ्लैट की बिक्री नहीं होने से नए प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग एकदम से कम हुई है। नए प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग में 68 फीसदी की कमी आई है।
चौंकाते हैं आंकड़े
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में दिल्ली-एनसीआर में तकरीबन 1.9 लाख बिना बिके हुए फ्लैट्स (अनसोल्ड इनवेंट्री) है। जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। नाइट फ्रैंक इंडिया के एग्जीक्यूटिव डाइरेक्टर राजीव बैराठी ने बातचीत के दौरान बताया कि रेजीडेंशियल प्रापर्टी की मांग न होने के कारण आवासीय परिसरों का बुरा हाल है, हांलाकि व्यवसायिक मार्केट में अभी भी लोगों की रुचि बरकरार है।
राजीव बताते हैं कि इस दौरान आफिस स्पेस और आईटी, आईटीएस, ई-कार्मस और बैंकिग सेक्टर में भी लोगों की रुचि बनी हुई है। सू़़त्रों की माने, तो आगे भी इनमें तेजी बनी रहने की संभावना है।
कीमतों में इजाफे की उम्मीद नहीं
रियल एस्टेट सर्वे कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया के नेशनल डायरेक्टर (रेजिडेंशियल मार्केट) मुदस्सिर जैदी की माने, तो एनसीआर के रियल्टी मार्केट में वर्ष 2015 की दूसरी छमाही में भी सुस्ती बरकरार रहेगी। जैदी बताते हैं कि 2014 की दूसरी छमाही के मुकाबले 2015 की पहली छमाही में सेल्स वॉल्यूम में 18 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। जैदी ने बताया की आने वाले महीनों में प्रॉपर्टी की बिक्री तो बढ़ेगी, लेकिन कीमतों में कोई इजाफा नहीं देखने को मिल सकता है। जबकि उनके नजरिए से यदि देखें तो वह कहते है कि, आने वाले 12 से 18 महीने तक प्रॉपर्टी की कीमतों में कोई इजाफा होने की संभावना नहीं लग रही है।
सच्चाई से दूर हैं निवेशक
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट की माने तो रियल्टी मार्केट में सुस्ती और कीमत नहीं बढ़ने से निवेशकों ने प्रापर्टी बाजार से दूरी बना ली है। स्थिति यह है कि लंबे समय के लिए निवेश करने वाले निवेशक भी अपना पैसा निकालना चाह रहे हैं। इसके चलते देश के बड़े रियल्टी मार्केट में से एक दिल्ली-एनसीआर अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है।
पूरी होगी आशियाने की चाहत
ग्रेटर नोएडा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खुशखबरी सुनने को मिल ही गई। अब उन लोगों का सपना पूरा होने वाला है, जो यमुना सिटी के किनारे अपना आशियाना बनाने की सोच रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यमुना प्राधिकरण तीन अगस्त को इनडिपेंडेंट प्लॉट्स की स्कीम लॉन्च करेगा। योजना के प्लाट सेक्टर-22 डी में हैं। जानकार बताते हैं कि यह सेक्टर एफ वन रेसिंग ट्रैक और स्पोर्ट सिटी के पास है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस स्कीम में 120 और 162 वर्ग मीटर के प्लॉट हैं। स्कीम में अप्लाई करने के लिए रजिस्ट्रेशन मनी बैंक से बतौर लोन ली जा सकेगी। इस स्कीम में एकमुश्त पेमेंट करने वालों को प्राथमिकता मिलेगी। स्कीम में अप्लाई करने वालों के लिए प्राधिकरण ने तीन श्रेणियां बनाई है। योजना की जानकारी देते हुए यमुना प्राधिकरण के एसीईओ ने बताया कि योजना आगामी तीन अगस्त को प्राधिकरण द्वारा लॉन्च की जाएगी। योजना का ड्रा आने वाले सितंबर माह की दो तारीख को तय किया गया है। 120 वर्ग मीटर के प्लाट आवेदन करने के लिए आवेदनकर्ता को एक लाख इकत्तर हजार रुपये एकमुश्त आवेदन शुल्क के रूप में देनी होगी, जबकि 162 वर्ग मीटर वाले प्लाट लेने के लिए आवेदन शुल्क के रूप में दो लाख इकतीस हजार रुपये जमा करने होंगे। योजना में किसानों का भी खास ख्याल रखा गया है। जिसके तहत उन्हें सत्रह फीसदी का आरक्षण योजना में आवेदन करने पर दिया जाएगा। जबकि फार्म का शुल्क एक हजार रुपये रखा गया है।
आठ साल में सबसे कम बिके मकान
नोएडा। मकानों की बिक्री के मामले में नोएडा पिछले आठ साल में अपने सबसे निचले स्तर में पहुंच गया है। जानकारों की माने, तो सबसे कम नोएडा में अप्रैल, मई और जून के दौरान केवल 3800 मकानों की बिक्री हुई, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे कम है। निवेशकों की मांग कम होने से मकानों की बिक्री कम रही है। बैंक आॅफ अमेरिका मेरिल-लिंच की रिपोर्ट में यह कहा गया है। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी बोफा-एमएल ने एक रिसर्च रिपोर्ट में बताया कि नोएडा में आवास बाजार लगातार कठिन बना हुआ है। खपत 2009 के स्तर से नीचे है। साल 2008-13 की तुलना में आपूर्ति या नई परियोजनाएं आधी हैं और कीमत पर दबाव है।

Thursday, 30 July 2015

चक्रवाती तूफान ‘कोमेन’ की चेतावनी, कई राज्‍यों में होगी भारी बारिश

 
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र ने चक्रवाती तूफान कोमेन का रूप धारण कर लिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक काेमेन के चलते शनिवार तक पश्चिम बंगाल, ओडिशा,मिजोरम, त्रिपुरा और असम में भारी बारिश का अनुमान है। अगले 48 घंटे के दौरान पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा के तटों पर 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी। वहीं पिछले एक हफ्ते से हो रही भारी बारिश से इस साल देश में सूखे की आशंका भी कम हो गई है।
मौसम विभाग ने कहा कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर पूर्व में बने कम दबाव के क्षेत्र ने चक्रवाती तूफान का रूप धारण कर लिया है और यह गुरुवार दोपहर तक बांग्लादेश को पार कर जाएगा। इस दौरान तटीय इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इसको देखते हुए आईएमडी ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी दी है।
देश में सूखे की आशंका घटी
जुलाई की शुरुआत में हुई कम बारिश ने चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन बीते एक हफ्ते में हुई बारिश से काफी राहत मिली है। 1 जून से 29 जुलाई के दौरान 421.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो कि सामान्य के मुकाबले सिर्फ तीन फीसदी कम है। सामान्य तौर पर इस दौरान 434.8 मिलीमीटर बारिश होती है। जुलाई के शुरुआत में कम बारिश होने की वजह से पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य के मुकाबले 8 फीसदी कम हो गया था।
पिछले 24 घंटे में गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश
आईएमडी के मुताबिक बुधवार को गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य के मुकाबले 10 गुना अधिक बारिश हुई है। इस दौरान सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में 66.5 मिलीमीटर बारिश हुई। इसी तरह गुजरात क्षेत्र में भी बुधवार को 79.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य के मुकाबले 6 गुना से भी ज्यादा है। बुधवार को राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश जारी रही और सामान्य के मुकाबले 6गुना ज्यादा और पूर्वी राजस्थान में 5 गुना ज्यादा बारिश हुई है।

हंगामे के बीच राजनाथ ने दिया गुरदासपुर हमले पर बयान, कहा आतंकवाद बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली. संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरदासपुर हमले पर जोरदार हंगामे के बीच बयान दिया। राजनाथ ने कहा कि सीमा पार से होने वाली किसी आतंकी वारदात का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इस दौरान विपक्ष में बैठे सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। बयान पूरा होते ही सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पंजाब में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अंतिम संस्कार के मद्देनजर कामकाज 2 बजे तक के लिए टाल दिया। 2 बजे राजनाथ सिंह ने बयान दिया।
वहीं, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने गुरदासपुर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए पंजाब पुलिस के अफसरों और जवानों की शहादत को याद किया। उन्होंने लोकसभा के पूर्व सदस्य श्रीबल्लव पाणिग्रही, आरएस गवई और बीके हांडिक को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद डॉ. कलाम के अंतिम संस्कार का हवाला देकर सदन की कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई।

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव: राहुल का फरमान, हिंदी में बात करें प्रवक्ता

-देश की आम जनता तक कांग्रेस का पक्ष पहुंचाने की हो रही है कवायद
-भाजपा प्रवक्ताओं की तरह ही अब कांग्रेस के प्रवक्ता हिंदी में ही बात करते नजर आएंगे
-कांग्रेस में हैं 48 प्रवक्ता, 18 राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, रणदीप सिंह सुरजेवाला मुख्य प्रवक्ता
-विभूति कुमार रस्तोगी-
नई दिल्ली। केंद्र से दस साल की सत्ता क्या गई, कांग्रेस को उन तमाम चीजों पर बारीकी से कवायद करनी पड़ रही है, जो पार्टी को देश की आम जनता के साथ मजबूती से जोड़ सके। इसी कड़ी में खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी कांग्रेस प्रवक्ताओं को फरमान जारी कर कहा है कि वे मीडिया के साथ बातचीत के दौरान हिंदी में बात करें। राहुल की यह कवायद बीते कुछ सालों में देश की आम जनता से दूर हो रही कांग्रेस पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि दस साल के कांग्रेसी शासन के दौरान या उसके आगे तक कांग्रेस के ज्यादातर प्रवक्ता अंगे्रेजी में अपना पक्ष मीडिया के समक्ष रखते थे। इससे पार्टी की बात आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही थी। अब भाजपा प्रवक्ताओं की ही तरह कांग्रेस के प्रवक्ता भी विशुद्ध रूप से हिंदी मीडिया के समक्ष बात करते नजर आएंगे।
दरअसल, अभी कांगे्रस में कुल 48 प्रवक्ता हैं। इनमें से 30 प्रवक्ता राज्यों के मुद्दों पर बात करने के लिए हैं। 18 प्रवक्ता देश के राष्ट्रीय मुद्दों पर मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने के लिए अधिकृत हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और कांग्रेस मीडिया के प्रभारी हैं। इनसे पहले अजय माकन कांग्रेस की ओर से मीडिया प्रभारी थे। सुरजेवाला की टीम में पूर्व गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह, शकील अहमद, राशिद अल्वी, मीम अफजल आदि प्रमुख हैं।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुद कांग्रेस प्रवक्ताओं की समय-समय पर बैठक लेते रहते हैं और उन्हें आक्रामक तरीके से पार्टी की बात मीडिया में रखने की सलाह देते हैं। आज यह माध्यम ऐसा है, जिससे बहुत तेजी से किसी की बात देश की आम जनता और गांव-गांव तक पहुंचती है। लेकिन यही ऐसी चूक बीते कुछ सालों में हुई है, जिससे पार्टी लोकसभा में महज 44 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। राहुल गांधी ने कहा कि जितना संभव हो, उतना प्रवक्ता हिंदी में ही बात करें।

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव: हाईकोर्ट को गुमराह कर रहे नोएडा के अफसर 0

-दस्तावेज न मिलने का दिया हवाला, लापरवाह रवैया बन रहा न्यायालय के लिए मुसीबत का सबब-
-पहले कोर्ट को बीघा और एकड़ में अरझाया-
-अब दस्तावेज न मिलने का दे रहे हैं हवाला-
-सेना और फार्म हाउस आॅनर दोनों हैं परेशान-
-अगली सुनवाई 27 अगस्त को सुनिश्चित-
अश्वनी श्रीवास्तव
नोएडा। सेना का भूमि विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। ज्ञात हो कि नोएडा के नंगली साकपुर समेत छह गांवों में सेना की भूमि की पुष्टि बीते दिनों हो चुकी है। मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। 28 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान नोएडा के अफसरों ने जो दलील दी वह न तो किसी के गले उतर रही है और न ही किसी सरकारी महकमे के अधिकारियों की जिम्मेदार होने का सबूत दे रही है। डिमार्केशन न हो पाने के कारण दो राज्यों का सीमा विवाद भी बरकरार है। हालांकि न्यायालय ने जिला प्रशासन को अगली 27 तारीख तक का वक्त दिया है। अगली सुनवाई में मामले को निस्तारित करने के लिए कहा है।
उल्लेखनीय है कि नोएडा के नंगली साकपुर समेत छह गांवों का मसला लंबे समय से कोर्ट में विचाराधीन है। मसले की वजह सेना की जमीन को जिला प्रशासन की मिलीभगत से भू माफियाओं को बेचा जाना है। जिन लोगों ने यहां भूमि, भू-माफियाओं से खरीदी है, उनके पास भूमि से संबंधित समस्त दस्तावेज मौजूद हैं। मजेदार बात यह है कि जिला प्रशासन की देखरेख में ही सारी भूमियों की रजिस्ट्री व दाखिल-खारिज इन्हीं प्रशासनिक अधिकारियों ने की। गौर करने वाली बात यह भी है कि विभागीय अधिकारियों की मुहर व हस्ताक्षर भी इन कागजों पर मौजूद हैं जिन्हें न्यायालय में विभागीय अधिकारी गायब होने की बात कर रहे हैं। मामले का खुलासा उच्च न्यायालय में एक याचिका की सुनवाई के दौरान हुआ। जबकि याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला प्रशासन की मिलीभगत के बगैर इतनी बड़ी भूमि का सौदा हो ही नहीं सकता था।
जिला प्रशासन के अफसरों के जहन में अब उच्च न्यायालय के आदेशों का भी खौफ नहीं है। अजीत बताते हैं कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान पहले तो अधिकारियों ने कोर्ट को गुमराह करते हुए भूमि कम बताई जबकि अब न्यायालय को दस्तावेज न होने की बात पर गुमराह कर रहे हैं। इससे फैसले में देरी हो रही है।
अजीत बंजरगी
याचिकाकर्ता

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : मासूम भिखारियों की संख्या बढ़ी

विवेकानंद चौधरी
नई दिल्ली। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में बाल भिखारियों की संख्या में इजाफा अमानवीय और संवेदनशील मामले के साथ चिंताजनक विषय है। यह देश की अस्मिता के लिए खतरा है, वह अलग। लेकिन सरकार और संबद्ध विभाग इस दिशा में मौन है। यदि ऐसा नहीं होता, तो यह समस्या आज भयावह रूप धारण नहीं करती। जब कभी मीडिया वाले इस मामले को तूल देते हैं, तो संबद्ध प्रशासन इस दिशा में सक्रिय जरूर होता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि इनकी सक्रियता सिवाए खानापूर्ति के कुछ नहीं होेती। यह ऐक्शन के नाम पर सिर्फ कुछ बाल भिखारियों की धर-पकड़ कर लेते हैं।
समस्या की मूल वजह और इसका निदान क्या है, इस बारे में समझकर कारगर कदम उठाने की जहमत तक नहीं उठाते। ऐसे में कहें कि इनका लचर रवैया राजधानी में बाल भिखाड़ियों की संख्या में इजाफा की प्रमुख वजह है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
पंद्रह से बीस हजार है संख्या अनुमान के अनुसार, इस समय दिल्ली में करीब पंद्रह से बीस हजार बाल भिखारी हैैं। यह दिल्ली के संपन्न इलाकों से लेकर स्लम बस्तियों तक आसानी से नजर आ जाएंगे। हैरत की बात है कि दिल्ली के अधिकांश मेट्रो स्टेशनों के मुख्य द्वार भी इनसे अछुते नहीं हैं।
पर्यटकों की संख्या में कमी की आशंका
ऐसे में यहां के गौरवमयी अतीत से प्रभावित होकर भारत भ्रमण पर आने वाले विदेशी सैलानियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इसे निश्चित रूप से भारतीय अस्मिता, संस्कृति और पर्यटन उद्योग के लिए शुभ संकेत नहीं कह सकते। विदेशी सैलानी स्वदेश लौट कर जो भारतीय तस्वीर पेश करेंगे, उसके देश के सैलानियों पर वह अमिट छाप छोड़ेगा। ऐसे में भारत-भ्रमण पर आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या में कमी होगी, इनकार नहीं कर सकते। इसका सबसे प्रमुख असर पड़ेगा, विदेशी मुद्रा की कमी और देश में महंगाई।
जल्द सतर्क होने की जरूरत
सरकार को इस दिशा में समय रहते सतर्क होने की जरूरत है। कहीं ऐसा नहीं हो कि यह समस्या इस कदर बढ़ जाए कि सरकार के लिए इस पर अंकुश लगा पाना मुश्किल हो। बाल भिखारियों की धर-पकड़ इस समस्या का निदान कतई नहीं है। ऐसे बच्चों को विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से चिह्नित कर इनकी बुनियादी जरूरतें हल कर इन्हें मुख्यधारा में लाने की कोशिश करनी चाहिए।
यह भी पता करना होगा कि इन बच्चों में भीख मांगने की प्रवृत्ति किन वजहों से है। वजहों का पता कर उसका निदान समस्या में कमी ला सकती है। लेकिन सरकार और संबद्ध प्रशासन का ध्यान इस ओर जाएगा, इसमें संदेह है।

Saturday, 25 July 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 योजनाएं लॉन्च कर बिहार को दिया तोहफा, नीतीश कुमार भी मंच पर रहे मौजूद


नयी दिल्ली/पटना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचकर पांच योजनाओं को लॉन्च किया. मोदी के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी मंच साझा किया. पीएम मोदी ने पटना-मुंबई ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. पीएम मोदी ने दनियावा-बिहारशरीफ रेल लाइन को भी हरी झंडी दिखाई. प्रधानमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना भी लांच की. सत्ता संभालने के बाद बिहार की अपनी पहली यात्रा पर यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजनीति के कारण राज्य का विकास अवरूद्ध हुआ है । इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य को 50 हजार करोड रूपये से ज्यादा का विशेष पैकेज उचित समय पर दिया जाएगा ।
बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी पार्टी का प्रचार अभियान शुरू करने के अलावा विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करने यहां आएं मोदी ने कहा ,‘‘मैं नीतीश जी की इस बात से सहमत हूं कि राजनीति ने राज्य के विकास को अवरूद्ध किया है और इस तरह राज्य का बहुत नुकसान हुआ है ।’’ उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान के संदर्भ में यह बात कही जिसमें कुमार ने कहा था कि अगर 2004 का चुनाव राजग सरकार के कार्यकाल की समाप्ति के छह महीने पहले नहीं हुआ होता तो दनियावान बिहारशरीफ की 38 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का काम पूरा हो गया होता ।
पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा ,‘‘ सरकार बदलने के बाद ,यहां से आए रेल मंत्रियों ने काम रूकवा दिया । जब हम सत्ता में आए तो हमने ये काम फिर शुरू करवाए।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जो लोग राजनीति करना चाहते हैं उन्हें वह करने दीजिए। लेकिन, बिहार के लोगों को इससे नुकसान हुआ है।’’ लोकसभा चुनाव से पहले बिहार को 50 हजार करोड़ रूपये का विशेष पैकेज देने के अपने वादे को दोहराते हुए मोदी ने कहा कि उचित समय आने पर इस वादे को पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मैने जो बिहार की जनता से वादा किया था, उसे सही समय आने पर आगे बढ़कर निभाउंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक समृद्ध बिहार के अपने सपने के तहत हम 50 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा का पैकेज देंगे। यह मेरा वादा है। देश तभी तरक्की करेगा जब उसका पूर्वी हिस्सा तरक्की करेगा। बिहार का विकास हमारा मुख्य एजेंडा है, पूर्वी भारत का विकास हमारा मिशन है ।’’ ‘‘सहयोगात्मक संघवाद’’ पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का विकास देश के विकास के लिए आवश्यक है।’’
पीएम के दौरे पर पोस्टर से प्रहार, लिखा- झांसे मे न आएंगे नीतीश को जिताएंगे
प्रधानमंत्री बिहार में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ‘मिशन 185+’ की शुरुआत मुजफ्फरपुर से करने वाले हैं. इस रैली के जोरदार तैयारी की गई है. बीजेपी हर हाल में इस रैली को बड़ा बनाना चाहती है. इसे बीजेपी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है.
 मोदी के दौरे से पहले पटना में ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें लिखा गया है कि ‘झांसे में न आएंगे- नीतीश को जिताएंगे.’ पोस्टर में इसे लगाने वाले का नाम नहीं है.  जिस रास्ते से पीएम जाने वाले हैं उसी रास्ते पर पोस्टर लगे हैं.
थोड़ी देर में पीएम पटना पहुंचने वाले हैं. पीएम के दौरे से पहले नीतीश कुमार ने ट्वीट किया है. नीतीश से मोदी को चुनाव में किया वादा याद दिलाया है. नीतीश ने लिखा है, ‘आपकी सरकार में देश के कुछ पूंजीपतियों का भला ज़रूर हुआ लेकिन सब यह जानना चाहते हैं कि देश की जनता का अच्छे दिन आने का इंतज़ार कब ख़त्म होगा?’
 नीतीश कुमार ने आगे लिखा है, ‘2022 तक सबको घर, और घरों में बिजली और पानी- आपका सपना जो बन गया सबका सपना. अब तक न संसाधन, न कोई योजना. जन धन योजना का आरम्भ ऐसा किया मानो लोगों के खाते नहीं तकदीर खुल रही हो. आज 70% से ज़्यादा खाते निष्क्रीय हैं और इन खातों के माध्यम से देश के सबसे गरीब तबके को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर इनकी मदद किस तरह से की जाएगी यह किसी को पता नहीं.’ पीएम मोदी की परिवर्तन रैली में पांच लाख लोगों के आने की संभावना जताई जा रही है. पीएम के साथ मंच पर एनडीए के सभी नेता मौजूद रहेंगे. लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार बिहार जा रहे हैं. इस रैली की सफलता ही एनडीए के चुनाव अभियान की दशा दिशा तय करेगी.

दूसरी करगिल की इजाजत कभी नहीं दूंगा : सेना प्रमुख 0

द्रास (जम्मू कश्मीर)। सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने आज कहा कि सैन्य बल कभी भी करगिल जैसा युद्ध होने नहीं देगा। करगिल युद्ध के शहीदों की याद में यहां बने एक स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘सेना कभी भी दूसरे करगिल की इजाजत नहीं देगी।’’ बहरहाल, करगिल युद्ध में भारत के विजय के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले ‘विजय दिवस’ की 16वीं वषर्गांठ का आयोजन 20 जुलाई से ही शुरू हो गया था और मुख्य कार्यक्रम का आयोजन आज और कल होगा। सेना धार्मिक गुरूओं की मौजूदगी में करगिल युद्ध स्मारक में शहीद सैनिकों की याद में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन करेगी। इसके बाद दीप प्रज्वलित की जाएगी। शहीदों के लिए पुष्पांजलि अर्पित करने का समारोह कल आयोजित होगा और इसके बाद वीर नारियों के साथ बातचीत होगी। पाकिस्तानी सैनिकों के साथ करगिल युद्ध मई 1999 में शुरू हुआ था जो दो महीनों तक चला था। इस युद्ध में भारतीय सेना के 490 अधिकारी, सैनिक और जवान शहीद हुए थे।

‘राष्ट्रीय उजाला’ विशेषः शहर का विकास मेरी पहली प्राथमिकता: बिमला बाथम


परिचय
नाम बिमला बाथम
पद विधायक गौतमबुद्व नगर उत्तर प्रदेश
जन्म तिथि 06 दिसंबर 1951
मूल निवास शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश
शिक्षा एमए. बरेली कॉलेज बरेली
अभिरूचि साहित्य पढ़ना
‘बुनियादी समस्याओं के समाधान कर जनता को दिलाऊंगी उनका हक’
अश्वनी श्रीवास्तव
नोएडा। उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्व नगर से पहली बार महिला प्रत्याशी के रूप में जीत कर बिमला ने न सिर्फ अपना नाम रोशन किया, बल्कि उन महिलाओं का भी हौसला अफजाई किया है, जो देश के आवाम की आवाज बनना चाहती हैं। प्रारंभिक जीवन से जन-गण की आवाज उठाने वाली बिमला को खासे संघर्ष के बाद आखिरकार गौतमबुद्व नगर की जनता ने अपना प्रतिनिधित्व सौंप दिया। करियर के शुरुआती दिनों में ही बिमला जनपद से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और बाद में पदाधिकारी भी रही, लेकिन 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में जब भारतीय जनता पार्टी ने देश में ऐताहासिक जीत दर्ज। इस लोकसभा चुनाव में नोएडा से डॉ. महेश शर्मा की जीत के बाद यहां विधानसभा की सीट खाली हुई। जिस पर पार्टी ने बिमला को ही जनपद से अपना चेहरा बनाया आइए आप को रू-ब-रू कराते हैं जनपद की जन प्रतिनिधि बिमला बाथम से।
प्रश्न- जनता द्वारा प्रतिनिधित्व मिलने के बाद आपकी प्राथमिकता क्या है?
मेरी सर्वप्रथम प्राथमिकता क्षेत्र का विकास करना है। और जनता से किया हुआ वायदा पूरा करना है। नोएडा में पानी की समस्या है। लोगों की माने तो पानी पीने योग्य क्या नहाने योग्य नहीं है।
प्रश्न- जनता तक शुद्ध जल की आपूर्ति के लिए आप क्या कर रही है?
पानी की समस्या जल्द हल करना हमारे प्रमुख एजेंडें में है। इसके लिए हमने कई बार जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारियों को भी पत्र लिखा है साथ ही जनता को पीने का स्वच्छ पानी मिले इसके लिए हमने कई बार प्रदर्शन भी किया है। हमारे कई बार आंदोलनरत होने के बाद भी जिला प्रशासन इस समस्या का हल खोजने में तत्परता नहीं दिखा रहा है। और गंगाजल बोलकर लोगों को गंदा जल पिला रहा है।
प्रश्न- पॉवर कट की समस्या और इससे उद्योगों के हो रहे पलायन की समस्या से कैसे निजात दिलाएंगी?
मै जनप्रतिनिधि होने के पूर्व से इस मुद्दे पर पार्टी की तरफ से लगातार शासन व प्रशासन से लड़ती रही हूं। जनता का चेहरा बनने के बाद भी मैने कई बार राज्य सरकार को इस समस्या से अवगत कराया व इस समस्या को हल करने के लिए भी निवेदन किया, लेकिन सत्ता में बैठी वर्तमान सपा सरकार किसी की बात सुनने को राजी ही नहीं है। जबकि सबसे ज्यादा रेवेन्यू पूरे राज्य को इसी हिस्से से मिलता है।
प्रश्न- प्रमुख मार्गों को यदि छोड़ दे, तो कई कॉलोनियों में तो पैदल चलना तक दूभर है। सड़क सुधार के लिए क्या कर रही हैं आप?
विधायक निधि से कई कार्य पास हो गए है। मैं चाहती हूं कि मेरी विधायक निधि का एक-एक पैसा क्षेत्र और जनता के विकास में लगे। मैने कच्ची कॉलोनियों की स्थिति से जिला प्रशासन को अवगत करा दिया है। जिस पर सरकार ने मेरे द्वारा भेजी गई विकास रिपोर्ट के आधार पर ही जिला प्रशासन को मंजूर कर दिया है। आने वाले समय में उन स्थानों पर विकास कार्य शुरू हो जाएंगें।
प्रश्न- टॉवरों के रेडियेशन उत्पन्न होने वाली समस्यों से आप जनता को कैसे निजात दिलाएंगी ?
इस बाबत मुझसे अभी तक किसी ने संपर्क नहीं किया है, लेकिन यदि निकट भविष्य में कोई संपर्क करेगा, तो हम आगे बढ़कर उसकी मदद करेंगे। मेरे लिए सर्वप्रथम हमारे क्षेत्रवासियों की जीवन रक्षा है उसके बाद कोई अन्य कार्य।
प्रश्न- हमारे समाचार पत्र से आप जनता को क्या संदेश देना चाहती है?
मै सर्वप्रथम आपके समाचार पत्र को शुभकामनाएं देना चाहती हूं। मैं शहर वासियों से अपील करती हूं कि जनपद को साफ-सुथरा रखे। और मोदी जी के अभियान को बढ़ चढ़कर आगे बढाÞए। मै क्षेत्रवासियों को आपके समाचार पत्र के माध्यम से कहना चाहती हूं कि न वो खुद पर अन्याय होने दे और न किसी और पर यदि किसी पर अन्याय हो रहा हो, तो उसे न्यायसंगत करने का प्रयास करें।

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव: डीएफसी लाएगी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव

-देश में चलेगी दुनिया की पहली विद्युतीकृत ट्रैक पर डबल डेकर मालगाड़ी, परवान चढ़ने वाली है रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना
-मूल उद्देश्य मालगाड़ियों की रफ्तार में तेजी लाना
-बहुत तेजी से चल रहा है ट्रैक का निर्माण कार्य
विभूति कुमार रस्तोगी
नई दिल्ली। देश में मालगाड़ियों की रफ्तार तेज करने के लिए रेल मंत्रालय ने 2006 में एक नई योजना तैयार की जिसका नाम दिया डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर (डीएफसी)। 30 अक्टूबर 2006 को रेल मंत्रालय ने अपने पूर्ण स्वामित्व में डीएफसी नाम से सार्वजनिक उपक्रम के रूप में पंजीकृत किया। इस कंपनी के मूल उद््देश्य में मालगाड़ियों की रफ्तार में तेजी लाना है।
मालगाड़ियों के लिए पूर्ण रूप से समर्पित रेलवे ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मुंबई से दादरी (दिल्ली-एनसीआर)(पश्चिमी कोरिडोर) और लुधियाना से दांकुनी (पश्चिम बंगाल))(पूर्वी कोरिडोर) तक। लेकिन खास बात यह है कि दो कोरिडोर का जंक्शन प्वाइंट दादरी है। जो मालगाड़ी लुधियाना से दांकुनी जाएगी, वह दादरी होकर और मुंबई से जो मालगाड़ी आएगी, वह भी दादरी ही पहुंचेगी। यह दोनों रेलवे ट्रैक पूर्ण रूप से मालगाड़ी के लिए समर्पित होगा। इस पर कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं चलेगी।
मतलब साफ है कि अभी मुंबई से जो मालगाड़ी दिल्ली करीब 4 में पहुंचती है, वह अब इस ट्रैक से महज एक दिन में पहुंच जाएगी। अब मालगाड़ियों का भी टाईम-टेबल होगा। इससे देश में व्यापार में जबरदस्त उछाल आएगा। इस योजना में दोनों कोरिडोर पर कुल 81 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। यह देश की सबसे बड़ी योजना है। इस योजना के लिए विश्व बैंक और जापान की जायका जैसी अंतर्राष्ट्रीय वित्त एजेंसियां मदद कर रही हंै। डीएफसी रेलवे ट्रैक विश्व का ऐसा पहला ऐसा रेलवे ट्रैक होगा जिस पर डबल स्टोरी (डबल डेकर) मालगाड़ी चलेगी। अभी पूरे विश्व में विद्युतीकृत डबल स्टैक कंटेनर कोरिडोर कहीं नहीं है।
दरअसल, देश में अभी तक सभी मालगाड़ियों का संचालन उन्हीं रेलवे ट्रैक पर होता है जिन पर राजधानी, शताब्दी, सुपर फास्ट ट्रेन, एक्सप्रेस ट्रेन, मेल ट्रेन, पैसेंजर ट्रेन आदि का संचालन हो रहा है। इन रेलवे ट्रैकों पर सभी ट्रेनों को पहले जाने दिया जाता है, फिर नंबर मालगाड़ियों का आता है। अन्य ट्रेनों को पार कराने के लिण् मालगाड़ियों को जगह-जगह छोटे-छोटे स्टेशनों पर घंटों खड़ा करवा दिया जाता है। एक ट्रेन को दिल्ली से कोलकाता या मुंबई से दिल्ली आने पर एक से दो दिन लगते हैं। वहीं मालगाड़ी को 4 से 6 दिन का समय लग जाता है। इससे व्यापारियों को काफी दिक्कत होती हैं। लिहाजा रेलवे ने सन 2005 के रेलवे बजट में देश में मालगाड़ियों के लिए अलग से डेडीकेटेड रेलवे ट्रैक बिछाने की बात कही थी। इसे डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर नाम से शुरू किया गया।
पहले चरण में भारत सरकार ने लगभग 3342 किलोमीटर मार्ग की पूरी लंबाई दो कोरिडोर, पूर्वी और पश्चिमी कोरिडोर पर काम शुरू किया है। यह मुंबई से दादरी और लुधियाना से पश्चिम बंगाल के दांकुनी तक है। मुंबई से जो मालगाड़ी दादरी (दिल्ली-एनसीआर) आएगी, वह हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों से गुजरेगी। वहीं जो लुधियाना से दांकुनी, पश्चिम बंगाल जाएगी, वह मालगाड़ी झारखंड, बिहार, उत्तर-प्रदेश और हरियाणा से होकर गुजरेगी।
भविष्य के कोरिडोर
1.    पूर्व-पश्चिम कोरिडोर (कोलकाता से मुंबई, 2330 किलोमीटर)
2.    उत्तर-दक्षिणी कोरिडोर (दिल्ली से चेन्नई 2343 किलोमीटर)
3.    पूर्वी तट कोरिडोर (खड़गपुर-विजयवाड़ा, 1100 किलोमीटर)
4.    दक्षिणी कोरिडोर (चेन्नई -गोवा, 899 किलोमीटर)
————————-
कुछ विशेषताएं…
-फ्रेट कोरिडोर में लंबे समय तक प्रचालन के साथ प्रति रेल भार की मात्रा 5000 से बढ़कर 13000 टन हो जाएगी।
-मालगाड़ी की रफ्तार अधिकतम गतिमान मौजूदा समय में 75 से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा और औसत गतिमान 25 से 27 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी।
-इससे उद्योग जगत, व्यापार जगत, निर्यातक, आयातक, शिपिंग लाइन, रेलवे थोक ग्राहकों को काफी फायदा होगा।
-पहला फेज खुर्जा से कानपुर तक सन 2017 तक चालू हो जाएगा।
विश्व का पहला विद्युतीकृत डबल स्टैक कंटेनर कोरिडोर
डीएफसी बनने के बाद रेल माल भाड़ा के परिवहन में काफी परिवर्तन होगा। माल का परिवहन तेजी से होगा। परिवहन लागत में भी कमी आने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त पश्चिमी कोरिडोर विश्व में पहला विद्युतीकृत डबल स्टैक कंटेनर कोरिडोर होगा। डीएफसी बनने के बाद मालगाड़ियों की गति बढ़ेगी। भारतीय रेल के मौजूदा रेलवे लइनों पर रेलगाड़ियों का भार कम होगा। इससे वर्तमान गाड़ियों की गति बढ़ने के साथ-साथ अतिरिक्त गाड़ियां चलाने के लिए लाइन क्षमता उपलब्ध होगी। डीएफसी बनने से जिन-जिन क्षेत्रों से डीएफसी की लाइनें गुजरेंगी, वहां पर औद्योगिक विकास में तेजी आएगी। पश्चिमी डीएफसी की लाइनों के साथ दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कोरिडोर कॉपोरेशन (डीएमआईसी) औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। इसकी परिवहन आवश्यकताओें के लिए डीएफसी रीढ़ की हड््डी साबित होगा।
राजेश खरे, उपमहाप्रबंधक डीएफसी (जनसंपर्क)

नेपाल व पाकिस्तान में भूकंप के झटके 0

काठमांडो। नेपाल में कल तकरीबन आधी रात को 4.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेपाल में 25 अप्रैल को विनाशकारी भूकंप आया था। इसके बाद से देश भूकंप बाद के बार बार आ रहे झटकों से जूझ रहा है। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र ने बताया कि रात 12 बजकर पांच मिनट पर आए भूकंप बाद के इस झटके का केंद्र काठमांडो के पूर्व में 75 किलोमीटर दूर डोलखा जिले में था। इसके साथ ही गोरखा भूकंप के बाद से चार या इससे अधिक तीव्रता वाले कुल 355 झटके आए हैं।
वहीं, पाकिस्तान में आज तड़के भूकंप के झटके महसूस किये गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 मापी गयी। मीडिया की खबरों के मुताबिक भूकंप के बाद बाद लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए थे। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण :यूएसजीएस: के मुताबिक भूकंप का केन्द्र इस्लामाबाद के पूर्वोत्तर में केवल 15 किलोमीटर दूर मरगल्ला की पहाड़ियों में 26 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह के 1:59 मिनट पर आया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, पेशावर, एबटाबाद और पूर्वी पंजाब सहित अन्य पर्वतीय इलाकों और उत्तर पश्चिमी खबर पख्तूनख्वा प्रांत में भूकंप के झटके महसूस किये गए। भूकंप के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे लेकिन इस दौरान किसी प्रक्रार के जान माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

Friday, 24 July 2015

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिवः भाजपा का बिहार में परिवर्तन का ब्लू प्रिंट तैयार, पीएम की 25 की रैली पर सबकी निगाह

-कई सौगात लेकर जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
-लीची नगरी मुजफ्फरपुर की रैली से विधानसभा चुनाव का आगाज
-करीब 14-15 मंत्रालयों ने मिलकर तैयार की है विकास की रूपरेखा
-अनंत कुमार, भूपेंद्र यादव और सौदान सिंह के कंधों पर अहम जिम्मेदारी
विभूति कुमार रस्तोगी
नई दिल्ली। हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में जीत की नई इबारत लिखने के बाद दिल्ली विधानसभा में चुनाव बुरी तरह से हारने वाली भाजपा बिहार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। बिहार विधानसभा चुनाव से फिर एक बार देश में भाजपा की जीत का पहिया घुमाने की कवायद में पार्टी जुट गई है। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा हर हाल में जीत दर्ज कर एक तीर से दो निशाना साधना चाहती है। पहला, लोकसभा चुनाव में मोदी का विरोध करने वाले नीतीश को सबक सिखाना और दूसरा, दिल्ली में हार के गम को बिहार में खुशी में बदलना। क्योंकि अगर भाजपा बिहार में सत्ता में नहीं आती है, तो उसके लिए उत्तर प्रदेश की सत्ता भी दिल्ली दूर जैसी हो जाएगी। लिहाजा अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में परिवर्तन का ब्लू प्रिंट भाजपा आलाकमान ने तैयार कर लिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद बिहार चुनाव पर न केवल सक्रिय हैं बल्कि वे पूरा समय दे रहे हैं। रैली की जिम्मेदारी केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को दी गई है।
आगामी 25 जुलाई को लीची नगरी मुजफ्फरपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक रैली और जनसभा एक तरह से भाजपा के लिए संजीवनी जैसा है। पीएम मोदी की इस रैली को विधानसभा चुनाव का आगाज के रूप में देखा जा रहा है। एक मंच पर एनडीए के सारे घटक दलों के नेता न केवल मौजूद रहेंगे बल्कि अपनी एकजुटता का प्रदर्शन भी करेंगे।
बिहार में परिवर्तन की बयार का चरणवद्ध खाका वित मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में 15 केंद्रीय मंत्रालयों ने खींच लिया है। इसके तहत तीन चरणों में सबसे पहले विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है। फिर योजनाओं में सुधार और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नई योजनाएं लांच करने की घोषणा की जाएगी। इनकी रूपरेखा राज्य में रेलवे, सड़क, आधारभूत संरचना, आईटी, शिक्षा, कृषि और औद्योगिक विकास के क्षेत्र को विकसित करने के मद्देनजर तैयार की गई है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 जुलाई को परिवर्तन की बयार बहाने की शुरुआत राज्य को विषेश पैकेज देने की घोषणा के साथ मुजफ्फरपुर की रैली में कर सकते हैं। केंद्र की ओर से बिहार आईआईएम, पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय स्तर का दर्जा और व्यवस्थाएं, पटना और बोध गया एयरपोर्ट को बेहतर करना और बड़ी सड़क परियोजनाओं को बेहतर और पूरा करने का हवाला दिया जा सकता है।
वित्त मंत्री जेटली के साथ बिहार विधानसभा चुनाव मद्देनजर योजनाओं का खाका तैयार करने में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा, पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ और कनिष्ठ मंत्री, रेलवे, नागरिक उड्यन, पर्यटन, सड़क परिवहन, दूर संचार और मानव संसाधन विकास मंत्री समेत अन्यों ने सहयोग दिया।
ये हैं बिहार से मंत्री
राधामोहन सिंह
रविशंकर प्रसाद
धमेंद्र प्रधान
राजीव प्रताप रूडी
रामकृपाल यादव
उपेंद्र कुशवाहा
इन सभी पर विभिन्न स्तरों पर राज्य चुनाव की कमान संभालने की जिम्मेदारी डाली जाएगी।
इन पर अहम जिम्मेदारी
अनंत कुमार
चुनाव प्रभारी की अहम भूमिका। पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रभारी रहने के कारण चुनावी रणनीति का अनुभव। केंद्र सरकार के मंत्रालयों की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार करना।
भूपेंद्र यादव
बिहार के प्रभारी महासचिव व रणनीति टीम के मुखिया। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को रिपोर्टिंग। प्रदेश की कोर टीम के साथ समन्वय। मीडिया और सोशल मीडिया की कमान।
सौदान सिह
संगठन की अहम जिम्मेदारी। बूथ प्रबंधन से लेकर राज्य स्तर पर संगठन की देखभाल की जिम्मेदारी। आरएसएस परिवार के साथ समन्वय।
एक नज़र
बिहार सरकार पहले ही केंद्र से 1. 10 लाख करोड़ की विषेश पैकेज की मांग की थी जो ग्रामीण सड़क पथ निर्माण, कृषि, पंचायती राज, नगर विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यटन क्षेत्र के लिए चाहिए था। बिजली घरों, मेट्रो और नमामि गंगा के लिए विषेश सहायता मांगी गई थी। बरौनी फर्टिलाइजर को खोलने की विषेश पैकेज की अपील की।
क्या कहते हैं केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह
इस बार बिहार की जनता सत्ता परिवर्तन के मूड में है। 2010 में मिले जनादेश का नीतीश कुमार ने अपमान किया है। जंगल राज से मुक्ति के लिए जनता ने एनडीए सरकार को सत्ता सौंपी थी लेकिन नीतीश जंगल राज से जाकर मिल गए।

उत्तर प्रदेशः 33 PPS अफ़सरों के हुए तबादले, जानिए कौन कहां गए ?

1-श्री लछी राम यादव जेड0ओ0 सोनभद्र से पुलिस उपाधीक्षक बलिया ।
2-श्री कपिल देव सिंह पुलिस उपाधीक्षक लोक आयुक्त कार्यालय लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक सीतापुर ।
3-श्री संतोष कुमार पुलिस उपाधीक्षक फैजाबाद से पुलिस उपाधीक्षक बरेली ।
4-श्री उमर दराज खाॅ सहायक सेनानायक 10वीं वाहिनी पीएसी बाराबंकी से पुलिस उपाधीक्षक महोबा ।
5-श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह पुलिस उपाधीक्षक पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक सोनभद्र पूर्व हुआ स्थानान्तरण संशोधित होकर अब पुलिस उपाधीक्षक मीरजापुर ।
6-डा0 राजेश तिवारी पुलिस उपाधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक देवरिया पूर्व हुआ स्थानान्तरण निरस्त ।
7-श्री शिष्यपाल पुलिस उपाधीक्षक शामली से सहायक सेनानायक द्वितीय वाहिनी पीएसी सीतापुर ।
8-श्री अपूर्व मिश्रा सहायक सेनानायक विशेष परिक्षेत्र सुरक्षा वाहिनी लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक एलआईयू फैजाबाद पूर्व हुआ स्थानान्तरण संशोधित होकर अब पुलिस उपाधीक्षक पीएसी मुख्यालय लखनऊ ।
9-श्री शमशेर सिंह पुलिस उपाधीक्षक एटा से पुलिस उपाधीक्षक प्रतापगढ़ पूर्व हुआ स्थानान्तरण संशोधित होकर अब पुलिस उपाधीक्षक फतेहगढ़ ।
10-श्री जगदीश सिंह पाटनी पुलिस उपाधीक्षक पुलिस अकादमी मुरादाबाद से सहायक सेनानायक 08वीं वाहिनी पीएसी बरेली ।
11-श्री उमाशंकर सिंह पुलिस उपाधीक्षक देवरिया से पुलिस उपाधीक्षक सीतापुर ।
12-श्री मुकेश चन्द्र मिश्रा पुलिस उपाधीक्षक मुजफ्फरनगर से पुलिस उपाधीक्षक सुलतानपुर ।
13-श्री नरेन्द्र पाल सिंह सहायक सेनानायक 23वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद से पुलिस उपाधीक्षक शामली ।
14-श्री कालू सिंह पुलिस उपाधीक्षक बरेली से पुलिस उपाधीक्षक पीटीएस मुरादाबाद ।
15-श्री अरूण कुमार सिंह पुलिस उपाधीक्षक मा0 मुख्यमंत्री सुरक्षा लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक पावर कारपोरेशन लखनऊ ।
16-श्री शिव सिंह सहायक सेनानायक 48वीं वाहिनी पीएसी सोनभद्र से पुलिस उपाधीक्षक पावर कारपोरेशन लखनऊ ।
17-श्री राहुल रूसिया पुलिस उपाधीक्षक मा0 मुख्यमंत्री सुरक्षा लखनऊ पुलिस उपाधीक्षक लोक आयुक्त कार्यालय लखनऊ ।
18-श्री सत्यम पुलिस उपाधीक्षक पावर कारपोरेशन इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक एलआईयू आगरा ।
19- श्री विजय कपिल पुलिस उपाधीक्षक/स्टाफ आफिसर पुलिस महानिरीक्षक आगरा जोन आगरा से पुलिस उपाधीक्षक महोबा पूर्व हुआ स्थानान्तरण निरस्त।
20-श्री लालधारी भारती पुलिस उपाधीक्षक हरदोई से पुलिस उपाधीक्षक बस्ती पूर्व हुआ स्थानान्तरण संशोधित होकर अब पुलिस उपाधीक्षक बलरामपुर ।
21-श्री कृष्ण स्वरूप दिनकर सहायक सेनानायक 39वीं वाहिनी पीएसी मीरजापुर से पुलिस उपाधीक्षक ललितपुर ।
22-श्री शिव नाथ गुप्ता सहायक सेनानायक 45वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक देवरिया।
23-श्रीमती प्रीतिबाला गुप्ता पुलिस उपाधीक्षक गाजियाबाद से पुलिस उपाधीक्षक रेलवे मुरादाबाद ।
24-श्री ओम प्रकाश सिंह पुलिस उपाधीक्षक औरैया से पुलिस उपाधीक्षक रेलवे इलाहाबाद ।
25-श्री राज कुमार पुलिस उपाधीक्षक संतरविदासनगर से पुलिस उपाधीक्षक वाराणसी ।
26-श्री सीता राम पुलिस उपाधीक्षक प्रतापगढ़ से पुलिस उपाधीक्षक पीटीएस मुरादाबाद पूर्व हुआ स्थानान्तरण निरस्त ।
27-श्री अवधेश कुमार पाण्डेय पुलिस उपाधीक्षक एलआईयू कानपुरनगर से पुलिस उपाधीक्षक पीटीएस मुरादाबाद ।
28-श्री अजेय कुमार शर्मा पुलिस उपाधीक्षक सीतापुर से पुलिस उपाधीक्षक बलिया।
29-श्री सत्य प्रकाश शुक्ला पुलिस उपाधीक्षक अम्बेडकरनगर से सहायक सेनानायक विशेष परिक्षेत्र सुरक्षा वाहिनी लखनऊ ।
30-श्री सोहराब आलम पुलिस उपाधीक्षक रेलवे इलाहाबाद से पुलिस उपाधीक्षक पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद ।
31-श्री प्रवीन कुमार यादव पुलिस उपाधीक्षक मीरजापुर से पुलिस उपाधीक्षक सोनभद्र ।
32-श्री हिमेश चन्द्र पाण्डेय पुलिस उपाधीक्षक पावर कारपोरेशन लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक अमेठी ।
33-श्री बालक राम पुलिस उपाधीक्षक बलरामपुर से पुलिस उपाधीक्षक बस्ती

याकूब की फांसी का मामलाः रॉ अधिकारी के लेख से विवाद, ओवैसी ने भी उठाए सवाल

मुंबई : मुंबई बम धमाका 1993 के दोषी याकूब मेमन की फांसी 30 जुलाई को निर्धारित थी, लेकिन फांसी से बचने के लिए अभी भी वह प्रयासरत है. हालांकि राष्ट्रपति भी उसकी दया याचिका को खारिज कर चुके हैं, इसी बीच एक ऐसी खबर आयी हैजो याकूब मेमन को फांसी देने के फैसले पर सवाल पैदा करती है. आज रीडीएफ डॉट कॉम ने एक लेख प्रकाशित किया है, जिसे वर्ष 2007 में रॉके पूर्व अधिकारी बी रमन ने लिखा था, लेकिन उसका प्रकाशन अब जाकर हुआ है. बी रमन ने अपने लेख में लिखा है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि याकूब मेमन मुंबई बम धमाकेका दोषी था, लेकिन जिस तरह उसने आत्मसर्मपण किया और जांच में सहयोग किया, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि उसे फांसी की सजा नहीं दी जानी चाहिए.
रीडिफ डॉट कॉम ने आज यह आलेख बी रमन के भाई से इजाजत लेकर प्रकाशित किया है. जिस वक्त याकूब मेमन को भारत लाया गया उस वक्त बी रमन रॉ की पाकिस्तान डेस्क के प्रमुख थे. वर्ष 2007 में शीला भट्ट नाम की पत्रकार ने याकूब मेमन पर दो पार्ट में स्टोरी की थी, जिसके एक पार्ट को लिखने से पहले उन्होंने बी रमन का साक्षात्कार करना चाहा और उसने यह गुजारिश की कि वे याकूब मेमन से जुड़ी उन तमाम तथ्यों को सामने लायें, जो अभी तक प्रकाशित नहीं हो सकी है.
बी रमन इस बात के लिए तैया र हो गये. वे याकूब मेमन को भारत लाने वाली एजेंसी में की पर्सन के तौर पर काम कर रहेथे. मेमन को भारत वापस लाने में जब सफलता मिली तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने काफी प्रसन्नता जतायी थी. याकूब मेमन की भारत वापसी के कुछ ही दिनों बाद बी रमन 31 अगस्त 1994 को रिटायर हो गये.  याकूब मेमन का दावा है कि वह अपने दम पर 19 जुलाई 1994 को भारत आया लेकिन सीबीआई ने पांच अगस्त 1994 को उसे गिरफ्तार बताया. रॉ अधिकारी बी रमन इस बात से वाकिफ थे.
बी रमन का देहांत वर्ष 2013 में 16 जून को हो गया. वे रीडिफ डॉट कॉम के नियमित स्तंभकार थे. इसलिए वे वर्ष 2007 में याकूब मेमन से जुड़े तथ्यों को उजागर करने के तैयार हो गये थे. जब याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनायी गयी थी, तो बी रमन दुखी थे. उन्होंने पत्रकार शीला को बुलाया और याकूब से जुड़े तथ्यों को उजागर करने के लिए तैयार हो गये, क्योंकि उनकी नजर में कानून द्वारा याकूब को फांसी देना गलत था.
बी रमन ने सारे तथ्यों को पहली बार पत्रकार के पास प्रकाशन के लिए भेज तो दिया, लेकिन वे इसे प्रकाशित करने में संकोच कर रहेथे, क्योंकि मामला अदालत में था. लेकिन फिर उन्होंने पत्रकार को फोन कर आलेख प्रकाशित करने को कहा. उनका मानना था कि कोई देश तभी सम्मान पा सकता है जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है. वे मानते थे कि एक संप्रभु राष्ट्र के संप्रभु अधिकारियों द्वारा किया गया वादा निगोसियेबल नहीं होता है. वह भी तब जब वादा याकूब मेमन जैसे व्यक्ति के साथ किया गया हो. मेमन कहीं से भी हमारी सहानुभूति का अधिकारी नहीं था.
याकूब मेमन ने जांच एजेंसियों काफी सहयोग किया था, उसने जांच करने वाली एजेंसी को यह बताया कि उसके परिवार के अन्य लोग कहां छुपेहैंऔर उन्हें वापस लाने में मदद किया. उन्होंने लिखा है कि इसमें कोईसंदेह नहीं है कि याकूब मेमन और उसका परिवार मुंबई बम धमाके में शामिल था, लेकिन जिस तरह का सहयोग उसने जांच एजेंसियों के साथ किया, उसके बाद उसे मौत की सजा देने पर पुनर्विचार किया जा सकता है.
असदुद्दीन ओवैसी और अबूआजमी के किया फांसी का विरोध
याकूब मेमन को फांसी दिये जाने का एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी और सपा नेता अबु आजमी ने विरोध किया है. ओवैसी का कहना है कि अगर याकूब मेमन दहशतगर्द है, तो कई और लोग भी हैंजो दहशतगर्द हैं, तो उन्हें फांसी क्यों नहीं दी जा रही है. धर्म के नाम पर यह भेदभाव क्यों? वहीं सपा नेता अबु आजमी का कहना है कि टाइगर मेमन के भाई याकूब मेमन ने आत्मसमर्पण किया. जांच में पूरा सहयोग किया, ऐसे में उसे फांसी देना सही नहीं होगा.

संसद का मॉनसून सत्रः कांग्रेस रवैये के खिलाफ धरने पर बैठे एनडीए सांसद 0

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र चौथे दिन आज कांग्रेस द्वारा संसद न चलने देने के खिलाफ भाजपा सहित एनडीए के सभी सांसद संसद भवन परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। सत्तापक्ष के सांसद नारे लगा रहे हैं, ‘संसद चलाओ, देश बचाओ।’ इसके साथ ही सांसद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार को लेकर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दोनों राज्यों में कांग्रेेस की सरकार है। मालूम हो कि भाजपा ने उत्तराखंड में शराब लाइसेंस के लिए नियम बदलने और हिमाचल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए छह करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप लगाया है।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही एक बार फिर विपक्षी सांसद सदन में जोर-जोर से हंगामा और नारेबाजी करने लगे। प्रत्युत्तर में सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी नारे लगाए। इसके बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। उधर, राज्यसभा में भी आज हंगामा हुआ। सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार व्यापमं और ललितगेट के लेकर सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा कर रहा है, जिसके चलते पिछले तीन दिनों से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ रही है।
दूसरी ओर संसद में जारी गतिरोध में सरकार के अहम बिल अटके हुए हैं। खासतौर पर भूमि अधिग्रहण संशोधन पर सबकी नजर टिकी है। बताया जा रहा है कि इसके लिए सरकार कुछ कदम पीछे खींच रही है। इसके तहत वह कुछ संशोधनों के लिए राज्यों को अधिकार दे सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भी अपने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की और विपक्ष को लेकर रणनीति नए सिरे से चर्चा की। इस बैठक में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेेंकैया नायडू आदि शामिल हुए।

यूपी : 200 रुपए के लिए जीआरपी सिपाहियों ने खिलाड़ी को चलती ट्रेन से फेंका, मौत

लखनऊ: यूपी में एक नेशनल लेवल के खिलाड़ी को जीआरपी के दो जवानों ने चलती ट्रेन से फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई है। यह घटना कासगंज की है। होशियार सिंह तलवारबाज़ था। पुलिस ने दो सिपाहियों रामविलास और राजेश समेत तीन लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया है।होशियार सिंह अपने परिवार के साथ एक पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी और मां को महिला कोच में बिठाया और खुद जनरल कोच में बैठ गए, लेकिन कुछ देर बाद पत्नी की तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें भी महिला कोच में जाना पड़ा, जहां मौजूद GRP (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) के सिपाहियों ने होशियार सिंह को वहां से जाने के लिए कहा। होशियार सिंह ने अपनी पत्नी की तबीयत ख़राब होने की बात बताई, लेकिन फिर भी GRP के जवानों उसे बैठने नहीं दिया। आरोप है कि सिपाहियों ने होशियार सिंह से महिला कोच में बैठने के लिए कथित रूप से 200 रुपये मांगे। जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो दोनों सिपाहियों ने उसके साथ हाथापाई की और उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। भले ही पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया हो, लेकिन परिवार का कहना है कि सिपाहियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज होना चाहिए।

Wednesday, 22 July 2015

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : स्लम बस्तियों में बांग्लादेशियों का बसेरा

विवेकानंद चौधरी
नई दिल्ली। राजधानी में हाल के वर्षों में बांग्लादेशियों की संख्या में इजाफा होना दिल्ली ही नहीं देश की सुरक्षा और अस्मिता के लिए शुभ-संकेत नहीं है। इनका अवैध तरीके से यहां आकर बस जाना अनवरत जारी है। इसमें निकट भविष्य में ठहराव आएगा, ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसी बात नहीं कि स्थानीय प्रशासन और सरकार इस समस्या से अनजान हैं। बावजूद बांग्लादेशी घुसपैठियों पर अंकुश लगाने के लिए कारगर ऐक्शन नहीं लेना इन्हें कटघरे में खड़ा करता है।
वैसे तो दिल्ली के तकरीबन हर इलाकों में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी मिल जाएंगे, लेकिन इनकी बहुतायत स्लम बस्तियों में है, जहां यह एकजुट होकर रहते हैं। सूत्र की मानें, तो पचास से सौ बांग्लादेशी अवैध तरीके से रोजाना दिल्ली में पनाह ले रहे हैं। दिल्ली में रहने वाला कोई घुसपैठिया जब बांग्लादेश से लौटता है, तो इसके साथ आठ-दस बांग्लादेशी दिल्ली में बसेरा डालने आ पहुंचते है। सूत्र के अनुसार इन्हें सीमा पार करने में कोई खास परेशानी नहीं होती। इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहली, यह सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को किसी तरह आंखों में धूल झोंककर भारत की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। और दूसरी, सीमा पार कराने वाले माफियाओं का बांग्लादेश और भारत दोनों देशों की सीमा पर मकड़जाल फैला है। इनकी सेटिंग सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों से होती है। यह माफिया पैसे लेकर सीमा पार करा देते हैं। दिल्ली में रहने वाले कुछ बांग्लादेशियों ने राष्टÑीय उजाला के संवाददाता को बताया कि यह सीमा पार करते समय कभी पकड़ लिए जाते हैं, तो मात्र हजार से पंद्रह सौ रुपये देने पर सीमा पर तैनात जवान ही इन्हें सीमा पार करने में मदद कर देता है। यह बात दिल्ली पुलिस के कुछ ऐसे अधिकारियों को भी पता है, जिन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठिये पकड़े हैं। इन्होंने नाम न छापने की शर्त पर संवाददाता को बताया कि पकड़ गए घुसपैठियों ने पूछताछ में बताया कि वह सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों का पैसा देकर भारत की सीमा में प्रवेश करने में कामयाब हुए थे। इन पुलिस अधिकारियों ने यह बात अपने आला अधिकारियों को मौखिक रूप से जरूर बताई थी, लेकिन ऐसे संवेदनशील मामले पर जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
दिल्ली क ी स्लम बस्तियों में नरेला, बवाना, टीकरी खुर्द, होलम्बी कलां आदि प्रमुख नाम है, जहां बांग्लादेशी बेखौफ रह रहे हैं। इन्हें खानापूर्ति के लिये जरूर पकड़ा जाता है। लेकिन कभी यह पैसे देकर छुट जाते हैं, तो कभी सीमा पर छोड़ने के बाद पुन: दिल्ली आने में कामयाब हो जाते हैं। हालात यह है कि बांग्लादेशी दिल्ली के अलावा निकटवर्ती राज्यों को भी अपना पनाहगार बना रहे हैं। हरियाणा के सोनीपत, मेवात, फरीदाबाद, गुड़गांव में यह अच्छी संख्या में हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और अलीगढ में इन घुसपैठियों की संख्या चिंता की विषय है। सवाल उठता है कि इस मामले में सरकार मौन क्यों है। कहीं यह वोट की राजनीति तो नहीं है। शायद इस बात में दम है। ऐसा नहीं होता, तो सरकार इस मसले पर जरूर गंभीर होती और बांग्लादेशियों की संख्या में लगातार इजाफा नहीं होता।

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : मां के नक्शे कदम पर चलेंगे राहुल

-पार्टी मुख्यालय में वीआईपी के साथ-साथ आमजन से भी मिला करेंगे कांग्रेस उपाध्यक्ष
-एसपीजी ने कुछ शर्तों के साथ दी अपनी मंजूरी
-24 अकबर रोड में लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरे
-सीसीटीवी के लिए कई एजेंसियां कर रही हैं सर्वे
विभूति कुमार रस्तोगी
नई दिल्ली। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अपने अभी तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी 44 सांसदों के साथ विपक्ष की अपनी भूमिका से जनता के बीच संवाद स्थापित करने में लगी है। लेकिन अब खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी मां और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नक्शे कदम पर चलकर आम लोगों से जुड़ना और मिलना-जुलना शुरू करना चाहते हैं।
दरअसल, सन 2004 तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पर वीवीआईपी, नेता और अप्वाइंटमेंट लेकर आने वाले लोगों से मुलाकात करती थीं। इसके अलावा वह जाते वक्त मुख्यालय में उनसे मिलने की आस लगाकर आए देश भर के आम लोगों से भी मिला करती थीं। यह परंपरा सोनिया गांधी ने 2004 तक जारी रखी थी। सन 2004 के बाद केंद्र में कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार बनने के बाद उनका कांग्रेस मुख्यालय में इस तरह आम लोगों से मिलने का सिलसिला बंद हो गया। केंद्र और दिल्ली से कांग्रेस की सरकार जाने के बाद अब 11 साल पहले की अपनी मां द्वारा शुरू की गई परंपरा को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी फिर शुरू करने जा रहे हैं।
वैसे अभी भी राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय आते हैं और लोगों व नेताओं आदि से मिलते हैं। लेकिन उनका मिलन उन्हीं लोगों से होता है जिनका पहले से अप्वाइंटमेंट फिक्स होता है। अब वे उन लोगों से मिलने के बाद जाने लगेंगे तो एक विशेष व्यवस्था के तहत कांग्रेस मुख्यालय में उन आम लोगों और आम कांग्रेस जन से भी मिलेंगे जो बिना किसी अप्वाइंटमेंट के पार्टी मुख्यालय में अपनी बात रखने या मिलने आते हैं।
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी एक हफ्ते में करीब 2-3 बार कांग्रेस मुख्यालय आएंगे और ऐसा करेंगे। हालांकि राहुल अपने हिसाब से समय और दिन घटा और बढ़ भी सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले राहुल की सुरक्षा में लगे एसपीजी से बात की गई। एसपीजी ने कुछ शर्तों के साथ इसकी मंजूरी दे दी। इसके लिए आम जन को एक निर्धारित जगह पर एक लाइन में लगना होगा ताकि जाते वक्त राहुल सबसे मिलते हुए आगे बढ़ते जाएं। एसपीजी ने कांग्रेस मुख्यालय की बेहतर सुरक्षा के लिए और अधिक सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही है। इस पर कांगे्रस के आला नेताओं ने पहल शुरू भी कर दी है। कांग्रेस मुख्यालय के बुलावे पर सीसीटीवी लगाने के लिए कई एजेंसियों ने सर्वे का काम भी पूरा कर लिया है। संभवत: कुछ दिनों में सीसीटीवी कैमरे लगने भी शुरू हो जाएंगे। राहुल गांधी की इस पहल से कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि राहुल जब से दो महीने की छुट्टी से लौटे हैं, उनका लोगों से मिलने-जुलने का दायरा बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इसे पार्टी के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं।

दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का दावा: उपराज्यपाल ने ऑफिस आने से रोका

नई दिल्ली। दिल्ली में सीएम और एलजी के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने दावा किया है कि उपराज्यपाल नजीब जंग ने उन्हें दफ्तर आने से मना किया है। हालांकि उपराज्यपाल दफ्तर ने इस आरोप से इंकार किया है। स्वाति ने कहा कि शायद पद पर रहकर काम ना कर पाऊं लेकिन महिला अधिकारों के लिए हमेशा लड़ती रहूंगी। स्वाति ने ट्वीट करके दावा किया कि उपराज्यपाल ने उनसे कहा कि वह कार्यालय ना जाएं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मैंने एलजी से मिलने का समय मांगा लेकिन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि क्यों डीसीडब्ल्यू ऑफिस ने हमारी नेमप्लेट हटाई, फाइलें ले लीं और ना आने को कहा?

संप्रग शासन और भाजपा सरकार में कोई अंतर नहीं : प्रकाश करात

इरोड (तमिलनाडु)। माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने केंद्र में भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि यह ‘‘भ्रष्टाचार में लिप्त’’ होने के मामले में पूर्ववर्ती संप्रग सरकार से अलग नहीं है। करात ने कल रात यहां एक जनसभा में कहा, ‘‘भ्रष्टाचार के मामले में मौजूदा भाजपा सरकार और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार में कोई अंतर नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक भाजपा के भ्रष्टाचार पर संसद में कोई टिप्पणी कर पाने में विफल रही हैं ।’’ करात ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्रियों संबंधी मामलों पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री तीनों को सत्ता से हटाएं और मामलों की जांच करें। करात ने कहा, ‘‘ भाजपा ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का वायदा कर केंद्र में सत्ता हासिल की थी लेकिन अपने शासन के पिछले 14 महीनों में वह बड़े भ्रष्टाचार में लिप्त रही।’’ उन्होंने दावा किया कि देश में केवल माकपा और वाम दल भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। करात ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा सरकार की ‘‘किसान विरोधी’’ नीति और उसके ‘‘भ्रष्टाचार’’ के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करेगी और बैठकें आयोजित करेगी।

IRCTC की पहल, बिना रसोई वाले ट्रेनों में भी अब मिलेगा खाना

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिस्ट कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने कहा है  कि कंपनी ने बिना रसोई यान वाली 1,356 ट्रेनों में ई-कैटरिंग की सुविधा शुरू की है। कंपनी ने एक बयान में कहा, सितंबर 2014 में परीक्षण के तौर पर आईआरसीटीसी ने इस सेवा को शुरू किया था। अभी तक पूरे देश में की विभिन्न ट्रेनों में आईआरसीटीसी ने 6,000 लोगों तक खाना पहुंचाया है। इनमें से केवल 350 लोगों को फास्ट-फूड पहुंचाया गया, बाकी सभी लोगों को पारंपरिक भारतीय भोजन उपलब्ध कराया गया।
आईआरसीटीसी ने एक बयान में कहा है कि आईआरसीटीसी रेलवे यात्रियों के लिए भारतीय भोजन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खाना मुहैया कराने वाली कई बड़ी कंपनियां और कैटर्स जैसे बीकानेरवाला, पंजाबी ग्रिल, करी किचन, इडली डॉट कॉम आदि के साथ बातचीत आखिरी दौर में हैं। यात्री आईआरसीटीसी की फोन लाइन और वेबसाइट से खाना ऑर्डर कर सकते हैं।

केजरीवाल और एलजी में फिर जंग, स्वाति की नियुक्ति को रद्द किया

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और एलजी के बीच एक बार फिर जंग छिड गई है। इस बार वजह है दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष का पद। एलजी नजीब जंग ने दिल्ली महिला आयोग की नवनिर्वाचित स्वाति मालीवाल की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। नजीब जंग ने स्वाति मालीवाल की नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उनकी अनुमति के बिना यह नियुक्ति हुई है। गौरतलब है कि केजरीवाल सरकार ने स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। स्वाति मालीवाल हरियाणा के शीर्ष आप नेता नवीन जयहिंद की पत्नी हैं, ऐसे में केजरीवाल पर यह आरोप लग रहा है कि उन्होंने अपने करीबियों को नियुक्त किया था।
वहीं दिल्ली महिला आयोग की वर्तमान अध्यक्ष बरखा शुक्ला ने भी कहा कि केजरीवाल सरकार संविधान को नहीं मानती है और उसे सिर्फ टकराव करना है। वहीं इस विवाद पर केजरीवाल सरकार का कहना है कि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए उपराज्यपाल की अनुमति की जरूरत नहीं होती है।

Tuesday, 21 July 2015

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : विवेकानंद फाउंडेशन दे रहा है मोदी को अधिकारी

-मोदी सरकार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसी विचारधारा पर आधारित थिंक टैंक विवेकानंद फाउंडेशन के सामरिक व रणनीतिक मामलों पर इनपुट-
-सूची में बीएसएफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व शहरी विकास सचिव अनिल बैजल, रक्षा शोध और विकास संगठन के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत, अनुसंधान और विश्लेषण विंग के पूर्व प्रमुख सीडी सहाय, रूस में भारत के राजदूत रहे प्रभात शुक्ला, पूर्व वायुसेना प्रमुख एसजी ईमानदार भी-
विभूति
नई दिल्ली। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा, पीके मिश्रा और अजीत मिश्रा मोदी सरकार बनने के तुरंत बाद ही केंद्र सरकार का अहम हिस्सा बन गए थे। नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाए गए थे। पीके मिश्रा एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर जुड़े थे। अजीत डोभाल को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसे अहम पद पर बैठाया गया। यह तीनों अधिकारी रिटायरमेंट के बाद विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन से जुड़े थे। विवेकानंद फाउंडेशन आरएसएस आधारित विचारों का एक केंद्र है। संघ की विचाराधारा से जुड़े रहने वाले दर्जनों नौकरशाह रिटायरमेंट के बाद विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। अब इनके बाद प्रकाश सिंह और अनिल बैजल के लिए मोदी सरकार में जगह तलाशी जा रही है। डोभाल के संस्था से हटने के बाद एनसी विज को वहां का निदेशक बनाया गया।
इस फाउंडेशन की खासियत यह है कि पूर्व नौकरशाह, पूर्व सैन्य अधिकारियों के अलावा ज्यादातर लोग यहां श्रम के रूप में दान करते हैं और इसके बदले कोई तनख्वाह नहीं लेते हैं।
दरअसल, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित एक ऐसा नियुक्ति केंद्र बन गया है, जहां मोदी सरकार के मनपसंद लोगों की पूरी टीम पहले से ही तैयार थी। धीरे-धीरे उन्हें सरकार में लगाया जा रहा है।
नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद भरोसे का अधिकारी माना गया। उन्हें अहम जिम्मेदारी देते हुए पीएमओ में प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया गया है। पीके मिश्रा को मोदी ने अपना एडिशनल सेक्रेटरी बनाया है। नृपेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव भी रहे थे। उनके बारे में कहा जाता था कि मोदी के पसंद तो थे ही, साथ ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भी पसंद के हैं।
अंदर की बात यह है कि बीएसएफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व शहरी विकास सचिव अनिल बैजल, रक्षा शोध और विकास संगठन के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत, अनुसंधान और विश्लेषण विंग के पूर्व प्रमुख सीडी सहाय, रूस में भारत के राजदूत रहे प्रभात शुक्ला, पूर्व वायुसेना प्रमुख एसजी ईमानदार की सूची तैयार है।
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के सलाहकार बोर्ड में एक से बढ़कर एक दिग्गज हैं। बोर्ड में पूर्व सेना प्रमुख वीएन शर्मा, रॉ के पूर्व प्रमुख एके वर्मा, पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एस कृष्णास्वामी, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, थिंकर एस गुरुमूर्ति, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के प्रोफेसर आर वैद्यनाथ, पूर्व सेना प्रमुख शंकर रॉय, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार, जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर एसके सिन्हा शामिल हैं।
विवेकानंद फाउंडेशन पर मोदी की नजर अनायास नहीं है। फाउंडेशन यूपीए सरकार की नाक में दम करने वाली गतिविधियों का केंद्र रहा है। परदे के पीछे तमाम योजनाएं इसी केंद्र में बनीं। जब सत्ताधारी कांग्रेस व यूपीए सरकार इशरत जहां मुठभेड़ मामले में नरेंद्र मोदी की घेराबंदी कर रही थी, उस वक्त अजीत डोभाल इशरत जहां केस में सबसे बड़े पैरोकार बने। उन्होंने इशरत जहां को लश्कर ए तैयबा का सदस्य बताकर घेराबंदी के राजनीतिक मोटिव पर सवाल उठाया। लालकृष्ण आडवाणी, गोविंदाचार्य, गुरुमूर्ति से लेकर संघ व भाजपा से जुड़े तमाम वरिष्ठ नेता व विचारक फाउंडेशन के विमर्श कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं।
 इन पर भी एक नज़र
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन को विवेकानंद केंद्र के नाम पर जमीन कांग्रेस के शासन काल में नरसिम्हा राव सरकार के दौरान मिली। भैरों सिंह शेखावत ने उपराष्ट्रपति के तौर पर 22 फरवरी 2004 को इस भवन का शिलान्यास किया था। दिसंबर 2009 में भवन का उद्घाटन माता अमृतानंद मयी और न्यायमूर्ति एमएन वैंकटचलैया ने किया था। फाउंडेशन के रिपोर्ट के मुताबिक आय का बड़ा स्रोत दान से प्राप्त राशि है। देश और विदेश से लोग इस संस्थान को अनुदान देते हैं। वर्ष 2013 में फाउंडेशन को एक करोड़ 49 लाख 56 हजार रुपये डोनेशन के तौर पर मिले। 2 लाख रुपए विदेश मंत्रालय से अनुदान में मिला। इसी साल मानदेय और वेतन पर 93 लाख 36 हजार से ज्यादा की राशि खर्च कर दी।